तूती की आवाज़
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गाँव में,वो बड़े नेता हैं
उनका रौब है ,उनकी चलती है
जनता उनके आस पास डोलती है ,
लोग कहतें है,उनकी तूती बोलती है
वो ही गाँव के बुलंद नेता,
जब दिल्ली जाते हैं
तो मिमियाते हैं या रहते मौन है
क्योंकि नक्कार खाने में ,
तूती की आवाज़ ,सुनता ही कौन है?

मेढक,जब कुए में टरटराता है
खुद को कुए का बादशाह समझता है
पर जब कुए के बाहर आता है
तो बस फुदकता ही रह जाता है
बाहर के शोर उसकी टर टर जाने कहाँ खो जाती है
बिलकुल भी सुनने में नहीं आती है

मदन मोहन बाहेती’घोटू’

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