तुम बड़ी तेज हो
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तुम बड़ी तेज हो
एक दम अंग्रेज हो
गोरी काया अंगरेजों सी,और राज करने का जज्बा
पहले उंगली पकड़ी मेरी और किया फिर दिल पर कब्ज़ा
एक दूसरे को लड़वा कर ,कायम करली अपनी सत्ता
कूटनीति की चालें खेली,रख कर पास तुरुप का पत्ता
करती हो साकार कहानी,दो बिल्ली एक बन्दर वाली
दिखा,बराबर बाँट रही हूँ,सारी रोटी खुद ही  खा ली
घर के  सभी माल-मत्ते को ,रखती स्वयं सहेज हो
तुम बड़ी तेज हो
एक दम अंग्रेज हो
गाल गुलाबी है तुम्हारे,और आँखें है काली काली
तुम्हारे होठों की रंगत,लाल लाल है और मतवाली
पीत वर्ण की स्वर्णिम आभा लिए तुम्हारी कंचन काया
ओढ़ रंगीन चुनरिया प्यारी,तुमने अपना रूप सजाया
तुम  रंगीन मिजाज़ बड़ा ही,मनमोहक है रूप निराला
मै तो था कोरे कपड़े सा,तुमने निज रंग में रंग डाला
अपने रंग में मुझे रंग लिया ,वो प्यारी रंगरेज हो
तुम बड़ी तेज हो
एक दम रंगरेज हो

मदन मोहन बाहेती’घोटू’

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