बेटा हो या बेटी हो
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जो भी इस जग में है आता,
बेटा हो या बेटी हो
सबमे भरता प्राण विधाता,
बेटा हो या बेटी हो
देता सूर्य रोशनी सबको,
बेटा हो या बेटी हो
बांटे चाँद,चांदनी सबको,
बेटा हो या बेटी हो
हवा सभी का तन सहलाये,
बेटा हो या बेटी हो
प्रकृति सब पर प्यार लुटाये,
बेटा हो या बेटी हो
नदिया सबकी,सबके सागर,
बेटा हो या बेटी हो
शिक्षा सबको मिले बराबर,
बेटा हो या बेटी हो
माँ शिक्षित तो बच्चे शिक्षित,
बेटा हो या बेटी हो
मिल कर करें देश को विकसित,
बेटा हो या बेटी हो

मदन मोहन बाहेती’घोटू’

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