जल प्रपात
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नदिया  का जल
जब कूदाफांदी करता है हो उच्श्रंखल
नीचे को भागता है अपना छोड़ धरातल
बड़ी गर्जना करता जाता
उर में छिपी हुई  सारी चाँदी दर्शाता
बड़े वेग से नीचे गिर कर
छोटी छोटी सी बूंदों में बिखर बिखर कर
ऊपर उड़ता
सूरज की किरणों को छूकर,
सुन्दर इन्द्र धनुष सा खिलता
तब दिखता जल का प्रताप है
जब बनता वो जल प्रपात है

मदन मोहन बाहेती’घोटू’

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