ससुराल-मिठाई की दूकान
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सालियाँ,नमकीन सुन्दर,और साला  चरपरा
टेड़ी सलहज जलेबी सी,मगर उसमे  रसभरा
सास रसगुल्ला रसीली,कभी चमचम रसभरी
काजू कतली उनकी बेटी,मेरी बीबी  छरहरी
और लड्डू से लुढ़कते, ससुर  मोतीचूर  हैं
हर एक बूंदी रसभरी है,प्यार से भरपूर  है
गुंझिया सा गुथा यह परिवार रस की खान है
ये मेरा ससुराल  या मिठाई  की दूकान  है
(होली की शुभकामनाये)
मदन मोहन बाहेती’घोटू’

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