गुटर -गूं

आओ हम तुम साथ मिल कर ,करें आपस में गुटर-गूं

गर्दनो को पास लाकर,एक दूजे से सटा कर
मै उडूं,फिर लौट आऊँ,पंख अपने फडफडा कर
चोंच में भर लाऊं दाना,और तुम्हारी चोंच में दूं
आओ हम तुम ,साथ मिल कर,करें आपस में गुटर-गूं
कोई हमको देखता है,तो हमें क्या,देखने दो
प्यार रत हम युगल प्रेमी,प्यार में बस डूबने दो
गोल आँखे,घुमा कर के,तुम मुझे,मै तुम्हे देखूं
आओ हम तुम साथ  मिल कर ,करें आपस में गुटर-गूं
पास बैठें,हम सिमट कर,कभी थोड़े दूर  हट कर
एक दूजे को समर्पित,एक दूजे से लिपट कर
अंग से अपने लगा कर, पूर्ण मन की चाह कर लूं
आओ हम तुम साथ मिल कर,करें आपस में गुटर -गूं

मदन मोहन बाहेती’घोटू’

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