बुढ़ापा कैसे काटें?

आया बुढ़ापा,हमतुम मिल कर वक़्त बितायें
इक   दूजे के  कामों में   हम हाथ   बँटाये
तुम धोवो कपडे और मै फिर उन्हें सुखाऊ
तुम पूरी बेलो ,मै उनको तलता  जाऊ
मै  सब्जी काटूं तुम उसमे   छोंक लगाओ
मै सेकूँगा टोस्ट और तुम चाय बनाओ
और फिर हमतुम साथ बैठ कर पीयें,खायें
आया बुढ़ापा,हमतुम मिल कर वक़्त बितायें
ना ही मुझको चिंता जल्दी दफ्तर जाना
ना ही तुमको फिकर सवेरे टिफिन बनाना
उठें देर से,मिल जुल काम सभी निपटायें
घूमे,फिरें,मौज मस्ती कर,पिक्चर जायें
हँसते ,गाते,दौर उमर का ये कट जाये
आया बुढ़ापा,हमतुम मिल कर वक़्त बितायें
साथ साथ जीवन काटा है,हम दोनों ने
सुख ,दुःख ,सबको,मिल बांटा है,हम दोनों ने
हरा भरा था पेड़ जहां थी खुशियाँ बसती
आया पतझड़,पंछी उड़े,छोड़ कर  बस्ती
पीड़ भुला कर ,उसी नीड़ में ,हम मुस्कायें
आया  बुढ़ापा,हमतुम मिलकर,वक़्त बितायें

मदन मोहन बाहेती ‘घोटू’

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