किसी से प्यार करो तो जानो
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नशा कितना किसी की चाहत में,
किसी से प्यार करो तो जानो
मज़ा क्या रूठने, मनाने में,
कभी मनुहार करो तो जानो
तुम्हारी ‘ना’ से टूट जाता दिल,
कभी इनकार  करो तो जानो
कैसे पत्थर भी पिघल जातें है,
कभी इसरार करो,तो जानो
अहमियत वादों की क्या होती है,
कभी इकरार  करो  तो जानो
रास्ता दिल का कितना टेढ़ा है,
निगाहें चार करो तो जानो
तुम्हे जो चाहता है उस दिल को,
कभी   गुलजार करो तो जानो
दिया है दिल तो जां भी दे देंगे,
कभी एतबार करो,तो जानो

मदन मोहन बाहेती’घोटू’          

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