जीवन का अंकगणित

आदमी हो या औरत,दो तरह के होते है
पोजिटिव   या निगेटिव
जब इनकी जन्मकुंडली का मिलान होता है,
तो जो अच्छी किस्मत पाते है
पति और पत्नी ,दोनों पोजिटिव मिल जाते है
तो जोड़ो,गुना करो या भाग दो,
या बड़े पोजिटिव से छोटे पोजिटिव को घटाओ,
नतीजा पोजिटिव ही निकलता है
और बदकिस्मती से,
पति और पत्नी में,एक पोजिटिव और एक नेगेटिव हुआ,
तो जिंदगी बन जाती है जुआ
तो गुना करो या भाग दो,
नतीजा निगेटिव होता है
पर पोजिटिव से निगेटिव को घटाने से,
दोनों जुड़ जाते है
पर दोनों का जोड़,पोजिटिव होगा या निगेटिव,
ये इस बात पर डिपेंड करता है कि,
दोनों में बड़ा कौन है,निगेटिव या पोजिटिव
और अगर दोनों निगेटिव हुए,
तो गुना हो या भाग,नतीजा पोजिटिव है
पर उनका जोड़ निगेटिव है
अत:सुखी जीवन के लिए ,
जन्म कुंडली से ज्यादा,
जीवन के अंक गणित का,
धनात्मक और ऋणात्मक मिलान जरूरी है

मदन मोहन बाहेती ‘घोटू’

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