Archive for July, 2012

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एक कदम पीछे हटा कर देखिये


एक कदम पीछे हटा कर देखिये

एक कदम पीछे हटा कर देखिये,
मुश्किलें सब खुद ब खुद हट जायेगी
अहम् अपना छोड़ पीछे जो हटे,
आने वाली बलायें टल जायेगी
सामने वाला तो ये समझेगा तुम,
उसके डर के मारे पीछे हट गये
उसको खुश होने दो तुम भी खुश रहो,
दूर तुमसे हो कई संकट गये
अगर तुमको पलट कर के वार भी,
करना है तो पीछे हट करना भला
जितनी ज्यादा पीछे खींचती प्रतंच्या,
तीर उतनी ही गति से है चला
आप पीछे हट रहे यह देख कर,
सामने वाला भी होता बेखबर
वक़्त ये ही सही होता,शत्रु पर,
वार चीते सा करो तुम झपट कर
और यूं भी पीछे हटने से तुम्हे,
सेकड़ों ही फायदे मिल जायेंगे
नज़र जो भी आ रहा ,पीछे हटो,
बहुत सारे नज़ारे दिख जायेंगे
बहुत विस्तृत नजरिया हो जाएगा,
संकुचित जो सोच है,बदलाएगी
एक कदम पीछे हटा कर देखिये,
मुश्किलें सब खुद ब खुद हट जायेगी

मदन मोहन बहेती’घोटू’

दुनिया की रंगत देख ली


i दुनिया की रंगत देख ली

क्या बतायें,क्या क्या देखा,जिंदगी के सफ़र में,

बहुत कुछ अच्छा भी देखा,बुरी भी गत देख ली

भले अच्छे,झूठें सच्चे,लोगो से मिलना हुआ,

धोखा खाया किसी से, कोई की उल्फत देख ली

स्वर्ग क्या है,नरक क्या है,सब इसी धरती पे है,

देखा दोजख भी यहाँ पर,यहीं जन्नत देख ली

उनसे जब नज़रें मिली तो दिल में था कुछ कुछ हुआ,

और जब दिल मिल गए,सच्ची मोहब्बत देख ली

कमाने की धुन में में थे हम रात दिन एसा लगे,

चैन अपने दिल का खोकर,ढेरों दौलत देख ली

परायों का प्यार पाया,अपनों ने धोखा दिया,

इस सफ़र में गिरे ,संभले,हर मुसीबत देख ली

हँसते रोते यूं ही हमने काट दी सारी उमर,

अच्छे दिन भी देखे और पतली भी हालत देख ली

गले मिलनेवाले कैसे पीठ में घोंपे छुरा,

कर के अच्छे बुरे सब लोगों की संगत देख ली
इतनी अच्छी दुनिया की रचना करी भगवान ने,
घूम फिर कर हमने इस दुनिया की रंगत देख ली
जब भी आये हम पे सुख दुःख,परेशानी,मुश्किलें,
हमने उसकी इबाबत की,और इनायत देख ली

मदन मोहन बाहेती ‘घोटू’

कार चाहिये


कार चाहिये

आदमी में होना अच्छे संस्कार चाहिये
प्रेमभाव मन में हो,नहीं विकार चाहिये
बुजुर्गों की करना सेवा ,सत्कार चाहिये
नहीं करना किसी का भी तिरस्कार चाहिये
करना अपने सारे सपने ,जो साकार चाहिये
ईश का वंदन करो यदि चमत्कार चाहिये
मैंने ये सब बातें शिक्षा की जो बेटे से कही,
बेटा बोला ठीक है पर पहले कार चाहिये

मदन मोहन बाहेती’घोटू’

चार चतुष्पदी


चार चतुष्पदी

बाजुओं में आपके होना बहुत दम चाहिये

जिंदगानी के सफ़र में सच्चा हमदम चाहिये

अरे’मै’मै’मत करो,’मै ‘से झलकता अहम् है,

साथ सबका चाहिये तो ‘मै’नहीं’हम ‘चाहिये

किटकिटाते दांतों को,होंठ छुपा देते है

चेहरे की रौनक में,चाँद लगा देते है

होंठ मुस्कराते तो फूल बिखरने लगते,

होंठ मिले,चुम्बन का स्वाद बढ़ा देते है

दूध में खटास डालो,दूध फट जाता है
रिश्तों में खटास हो तो घर टूट जाता है
जीवन तो पानी का ,एक बुलबुला भर है,
हवा है तो जिन्दा है,वर्ना फूट जाता है

मुझे,आपको और सभी को ये पता है
अँधा भी रेवड़ी,अपनों को ही बांटता है
सजे से शोरूम से जो तुम उतारो सड़क पर,
पैरो तले कुचलने से,जूता भी काटता है

मदन मोहन बाहेती’घोटू’

मेरे दिल का मकां खाली


मेरे दिल का मकां खाली

घुमड़ कर छातें है बादल,पर बरसते हैं नहीं
आप खुश तो नज़र आते,मगर हँसते है नहीं
खामखाँ ही आशियाना,ढूँढने को भटकते ,
मेरे दिल का मकां खाली ,इसमें बसते हैं नहीं
पड़े तनहा बिस्तरे पर ,रहते हैं तकिया लिए,
हमें तकिया समझ बाँहों में यूं कसते है नहीं
करते रहते खुद से बातें,आईने के सामने,
मुस्करा ,दो घडी ,बातें,हमसे करते है नहीं
बेपनाह इस हुस्न को लेकर न यूं इतराइये,
इश्क के बिन हुस्न वाले,भी उबरते है नहीं
करने इजहारे मुहब्बत,आपके दर आयेंगे,
हम वो आशिक ,जो किसी से,कभी डरते है नहीं
क्या कभी देखा है तुमने,जिनके दिल हो धधकते,
वो हमारी तरह ठंडी आहें भरते है नहीं
आपकी इस बेरुखी ने,कितना तडफाया हमें,
खुद भी तड़फे होगे क्या ये ,हम समझते हैं नहीं

मदन मोहन बाहेती’घोटू’

क्या जरूरी गाय घर में पालना?


क्या जरूरी गाय घर में पालना?

क्या जरूरी गाय घर में पालना,

दूध मिलता है बहुत बाज़ार में

क्यों उठायें सेकड़ों हम जहमतें,

दूध पाने के लिए बेकार में

चंद महीने दूध देती गाय है,

कुछ दिनों के बाद होती ड्राय है

साथ में बछड़ा पड़ेगा पालना,

दूध पीने का अगर जो चाव है

दूध देती गाय मारे लात भी,

दूध के संग लात भी तो खाइये

मार से बचना अगर है आपको,

प्यार से पुचकारिये, सहलाइये

घास भी सूखी,हरी चरवाईये ,

दाना,पानी,खली ,बंटा दीजिये

बांध कर रखिये,न तो भग जायेगी,

सौ तरह की मुश्किलें सर लीजिये

सींगों से भी बचना होगा संभल कर,
बहुत पैनापन है इनकी मार में
क्या जरूरी गाय घर में पालना,
दूध मिलता है बहुत बाज़ार में

मदन मोहन बाहेती ‘घोटू’