आओ, देश को लूटें

आओ ,देश को लूटें

लेकिन कुछ ऐसे कि,

सांप भी मर जाए,लाठी भी ना टूटे

सत्ता में रह कर के ,रिश्वत ना खाना है

पैसा भी कमाना है,भरना खजाना है

तो एसा तरीका अपनाये

किसी कि नज़र भी ना लगे,

काम भी बन जाये

हम अपना जन्म दिन मनायें

पहने हज़ार रुपयों के ,

नोटों से बनाया गया हार

और लाखों लोगो से लें,

बेंक के ड्राफ्ट से ,अपने नाम उपहार

सारी काली कमाई,एक नंबर में आएगी

आलोचकों कि बाट लग जायेगी

सारा पैसा व्हाइट है

आप एक दम राइट है

पैसा भी कमा लिया ,

और आयकर वालों के ,कहर से भी छूटे

आओ,देश को लूटें

हमें अच्छी तरह याद है

दहेज़ लेना या देना,कानूनी अपराध है

वैसे हमारे पास,धन कि क्या कोई कमी है?

पर हम सत्ता में है और बेटी ब्याहनी है

बेटी की शादी में ज्यादा दिखावा न करें
शोर शराबा न करें
सबको दहेजमुक्त शादी दिखलायें
पर दामाद जी और उनके घरवालों को ,
दूसरी तरह से फायदा पहुंचायें
अपने पावर और पहुँच से,
किसी बिजनेस मेन को ओब्लायिज़ करें
और वो बिजनेस मेन,
करोड़ों का माल,कोडियों के दाम में बेच,
बेटी के ससुराल वालों को ओब्लायिज करे
एसा कुछ सिलसिला जमा लें
की कैसे भी दामाद जी ,
फटाफट करोड़ों कमालें
ऐसे या वैसे,दहेज़ तो पहुँच ही गया,
और दहेज़ देने के आरोप से भी छूटे
सांप भी मर जाये,लाठी भी ना टूटे
आओ, देश को लूटें

मदन मोहन बाहेती’घोटू;

Advertisements