रास्ता मंजिल का

तुममे भी जोश था और हम मे भी जोश था,
अनजान रास्तों पर ,जब हम सफ़र थे दोनों
ये कर लें,वो भी पालें,सारे मज़े उठा लें,
कर लें सभी कुछ हासिल,बस बे सबर थे दोनों
कांटे बिछे है पत्थर,दर दर पे लगे ठोकर,
रस्ते की मुश्किलों से,कुछ बे खबर थे दोनों
खोये थे हम गुमां में,देखा तो इस जहाँ में,
कितने भरे समंदर,बस बूँद भर थे दोनों
एसा जो हमने पाया, धीरज नहीं गमाया,
सोये थे अब तलक हम, अच्छा हुआ जो जागे
बेगानी सी दुनिया में,एक दूसरे को थामे,
भर कर के जोश दूना,बढ़ने लगे हम आगे
मन में हो लगन तो फिर,कुछ भी नहीं है मुश्किल,
थोड़े जुझारू बनके, कर लोगे लक्ष्य हासिल
अनुकूल होंगे मौसम,हो साथ सच्चा हमदम,
हारो न हौंसला तुम, तुमको मिलेगी मजिल

मदन मोहन बाहेती’घोटू’

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