वर्ना ……………..?
नए वर्ष की नयी सुबह,
दिल्ली में सूरज नहीं निकला
शायद वह ,दिल्ली में ,
देश की एक बेटी के साथ ,
कुछ दरिंदों द्वारा किये गए ,
बलात्कार से लज्जित था
या शायद,
देश के नेताओं की सुस्त प्रतिक्रिया ,
और व्यवहार से लज्जित था
या शायद ,
दामिनी की आत्मा ने ऊपर पहुँच कर,
उससे कुछ प्रश्न किये होंगे,
और उससे कुछ जबाब देते न बना होगा ,
तो उसने कोहरे की चादर में,
अपना मुंह छुपा लिया होगा
क्योंकि अगर सूरज दिल्ली का नेता होता ,
तो बयान देता,
ये घटना उसके अस्त होने के बाद हुई,
इसलिए इसकी जिम्मेदारी चाँद पर है
उससे जबाब माँगा जाय
और यदि उससे यह पूछा जाता कि ,
क्या दिन में ऐसी घटनाएं नहीं होती ,
तो शायद वो स्पष्टीकरण देता ,
कि जब बादल उसे ढक लेते है,
तब ऐसा हो जाता होगा
सब अपनी जिम्मेदारी से,
कैसे कैसे बहाने बना ,
बचने की कोशिश करते रहते है
और दामिनियोन की अस्मत लुटती रहती है
पर अब जनता का आक्रोश जाग उठा है ,
बहाने बनाना छोड़ दो ,
थोडा सा डरो ,
और कुछ करो
वरना ………….?
मदन मोहन बहेती’घोटू’

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