उलाहना

तुम ने मुझसे प्यार जता कर ,मीठी मीठी बातों में
मुझको दीवाना कर डाला ,नींद चुरा कर ,रातों में
मेरी तब नादान उमर थी,मै तो थी भोलीभाली
तुम्हे बसाया था आँखों में,करने दिल की रखवाली
ऐसे चौकीदार बने तुम,खुद ही लुटेरे बन बैठे
मेरे दिल को चुरा ले गए ,साजन मेरे बन बैठे
ऐसा जादू डाला मुझ पर,प्यार भरी सौगातों ने
मुझको दीवाना कर डाला ,नींद चुरा कर रातों में
दिल के संग संग चैन चुराया,नींद चुरायी आँखों की
किस से अब फ़रियाद करू,ये दौलत तो थी लाखों की
मै पागल सी ,हुई बावरी,दीवानी सी,लुट कर भी
तुम्हारे ख्यालों में खोई,ख़ुशी ख़ुशी,सब खोकर भी
अपना सब कुछ सौंप दिया है,अब तुम्हारे हाथों में
मुझको दीवाना कर डाला ,नींद चुरा कर ,रातों में

मदन मोहन बाहेती’घोटू’

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