परहेज

आम अलबेला ,चीकू,केला ,
और अंगूर मुझे वर्जित है
तला समोसा ,उत्पम ,डोसा ,
ना खाऊ ,इसमें ही हित है
मीठा हलवा ,पूरी तंलवा ,
से करना परहेज पडेगा
गरम परांठे ,खा ना पाते ,
क्योंकि ‘क्लोरोस्ट्रल’ बढेगा
पालक,दालें ,खाना टालें ,
‘यूरिक एसिड ‘बढ़ जाएगा
और टमाटर ,खाना बचकर ,
‘ब्लेडर’में पत्थर आयेगा
न तो इमरती,ना ही जलेबी ,
ना गुलाब जामुन खा पाता
कोई मिठाई ,जाये न खायी ,
‘शुगर’का ‘लेवल ‘बढ़ जाता
चाट पकोड़ी ,खाना छोड़ी,
‘एसिडिटी ‘ बढ़ा देती है
कुल्फी,चुस्की ,खाना ‘रिस्की’
‘टोन्सिल ‘ लटका देती है
पीज़ा ,बर्गर ,रहना बच कर,
ये तो है दुश्मन सेहत के
घी और मख्खन ,खा न सके हम ,
‘ओबेसिटी’बढ़ेगी झट से
ये ना खाऊं ,वो ना खाऊ,
रहूँ सदा परहेजी बन के
मै क्यों करके,इतना डर के,
मजे उठाऊ ना जीवन के
सिर्फ हवा खा ,या फिर गम खा ,
जीवन जाता नहीं गुजारा
रस जीवन के ,ले लूं जम के ,
मानव तन ना मिले दुबारा
जो मन भाये,सरस सुहाये ,
वो खाने से ,नहीं डरूं मै
अगर मौत का ,दिन है पक्का ,
तो काहे परहेज करूं मै

मदन मोहन बाहेती ‘घोटू’

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