एक बड़ी नाजुक सी,एक बड़ी फूहड़ सी
एक बाल बिखराये ,और एक सुगढ़ सी
एक हरी भरी सुन्दर ,नन्ही सी ,प्यारी सी
एक बड़ी मोटी और बेडोल ,काली सी
एक रम्य ,रम्भा सी ,एक राक्षस वर्णी
खुशबूए दोनों की ,मगर एक ही धर्मी
भोजन ,मिष्ठानो में ,वही स्वाद लाती है
बार बार हमको ये,लेकिन सिखलाती है
रूप रंग भ्रामक है ,सिर्फ शकल मत देखो
सही परख आवश्यक ,अन्दर के गुण देखो

मदन मोहन बाहेती’घोटू’

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