मसाला ,
ये शब्द होता है बड़ा प्यारा
क्योंकि इसमें आता है साला
हर एक की अलग अलग खुशबू ,
अलग अलग स्वाद
जीवन और खाने को बनाते है लाजबाब
सबका अपना अपना रूप रंग होता है
जैसे हल्दी पीली और धनिया गोल होता है
जीरा ,जीर्ण शीर्ण ,राइ गोल नन्ही सी ,
और लोंग माथे पर ,मुकुट सा पहने सी
सिर्फ एक मिर्ची है जो कई रंगों वाली है
हरी,लाल,पीली है और कभी काली है
मोटी है ,पतली है, लम्बी है, छोटी है
और गोलमोल कालीमिर्च होती है
तुंदियल सी शिमलामिर्च
लाल,हरी और पीली होती है
और छोटी सी लोंगा मिर्च ,
ज़रा सी खा लो तो मुंह में आग लगा दे,
इतनी चरपरी होती है
भोजन में चटकारे,सारे के सारे,
मिर्ची से ही आते है
लोग सी सी कर ,सिसकारियां भरते है ,
पर चाव से खाते है
बिना मिर्ची के,चाट का ठाठ,
एकदम फीका पड़ जाता है
जितनी झन्नाट होती है,उतना मज़ा आता है
आज खालो,तो दुसरे दिन सुबह तक,
अपना असर दिखाती है
पर खाने की रंगत ,मिर्ची से ही आती है
इस जीवन में रंगत और स्वाद ,
साले और बीबी से ही आता है
लोग भले ही सी सी करते है,पर सुहाता है
इसीलिये साले ,मसाले की तरह होते है ,
और औरत को मिर्ची भी कहा जाता है

मदन मोहन बाहेती’घोटू’

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