हम उनके चूसे आम को ,फिर से है चूसते ,
देखो हमारे इश्क की ,कैसी है इन्तहा
आता है स्वाद आम का पर संग में हमें ,
उनके लबों के स्वाद का भी मिलता है मज़ा

उनके गुलाबी रसभरे ,होठों से था लगा ,
कितने नसीबोंवाला था,’घोटू’वो आम था
उनने जो छोड़ा ,हमने था ,छिलका उठा लिया ,
उनके लबों का उसपे लिपस्टिक निशान था

था खुशनसीब आम वो ,उनने ले हाथ में,
होठों से अपने लगा के रस उसका पी लिया
गुठली भी चूसी प्रेम से ,ले ले के जब मज़े ,
इठला के बड़े गर्व से ,गुठली ने ये कहा
दिखने में तो लगती हूँ बड़ी सख्त जान मै ,
मुझको दिया मिठास है अल्लाह का शुक्रिया
उनने लगा के होठों से रस मेरा ले लिया ,
मैंने भी उनके रस भरे ,होठों का रस पिया

वो चूसते थे आम ,हमने छीन ले लिया ,
उसकी मिठास ,स्वाद हमें आज भी है याद
हमने जो चूसा आया हमको स्वाद दोगुना ,
थी आम की भी लज्जत ,तेरे होंठ का भी स्वाद

मदन मोहन बाहेती’घोटू’

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