आज का मौसम
आज ठंडी सी हवाएं चल रही है ,
ऐसा लगता है कहीं बरसात आई
मेरे दिल को बड़ी ठडक मिल गयी है ,
देख मुख पर तुम्हारे मुस्कान छाई
कल तलक तो थी तपिश,मौसम गरम था ,
और थपेड़े गरम लू के चल रहे थे
आपकी नाराजगी से दिल दुखी था ,
और विरह की आग में हम जल रहे थे
बहुत तडफा मन,तुम्हारी याद में था ,
आँख कितनी बार मेरी डबडबाई
आज ठंडी सी हवाएं चल रही है,
एसा लगता है कहीं बरसात आई
आपका भी हाल होगा हमारे सा,
आपको भी याद मेरी आई होगी
घिरे होंगे याद के बादल घनेरे ,
भावनाएं घुमड़ कर मंडराई होगी
चाह तुममे भी हमारी जगी होगी,
मिलन को बैचैन हो तुम कसमसाई
आज ठंडी सी हवाएं चल रही है ,
ऐसा लगता है कहीं बरसात आई

मदन मोहन बाहेती’घोटू’

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