एक ही थैली के चट्टे बट्टे
खुद है गंदे ,और हमको साफ़ करने आ गये
देखो बगुले,भक्त बन कर,जाप करने आ गये
कोर्ट में लंबित है जिनके ,गुनाहों का मामला ,
अब तो मुजरिम भी यहाँ,इन्साफ करने आ गये
भले मंहगाई बढे और सारी जनता हो दुखी ,
भाड़ में सब जाये ,खुद का लाभ करने आ गये
यूं ही सब बदहाल है ,टेक्सों के बढ़ते बोझ से,
हमको फिर से नंगा ये चुपचाप करने आ गये
रोज बढ़ती कीमतों से,फट गया जो दूध है,
उसके रसगुल्ले बना ये साफ़ करने आ गये
एक ही थैली के चट्टे बट्टे,मतलब साधने ,
कौरवों से पांडव ,मिलाप करने आ गये
पाँव लटके कब्र में है,मगर सत्ता पर नज़र,
बरसों से देखा ,वो पूरा ख्वाब करने आ गये
बहुत हमको रुलाया,अब तो बकश दो तुम हमें,
सता करके फिर हमें ,क्यों पाप करने आ गये
बहुत झेला हमने ‘घोटू’,वोट हमसे मांग कर ,
फिर से शर्मिन्दा हमें ,क्यों आप करने आ गये

मदन मोहन बाहेती’घोटू’

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