अपनी अपनी जीवन शैली

कभी कभी जब धूप निकलती,है यूरोप के शहरों में
तो अक्सर हमने देखा है ,इन उजली दोपहरों में
जोड़े जवां धूप में बैठे ,मज़ा उठाते छुट्टी का
और बूढ़े भी घूमा करते , हाथ पकड़ कर बुड्डी का
उनके बेटे अपने घर है, पोते पोती अपने घर
ओल्ड एज होमो में एकाकी जीवन कटता अक्सर
पर जब भी मौका मिलता है,ख़ुशी ख़ुशी वो जीते है
बैठ रेस्तरां ,बर्गर खाते,ठंडी बीयर पीते है
सबके अपने संस्कार है, अपनी अपनी शैली है
होती भिन्न भिन्न देशों की,परम्परा अलबेली है

मदन मोहन बाहेती’घोटू’

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