नाम

होते है सबके अलग अलग ,अपने नाम है
कुछ नाम कमाते है करके नेक काम  है
होते ही पैदा सबसे पहले मिलती चीज जो ,
होती जो तुम्हारी है ,वो तुम्हारा  नाम है
बच्चे के पीछे नाम रहता उसके बाप का,
बीबी के पीछे रहता वो शौहर का नाम है
करते है बुरे काम जो,बदनाम वो होते,
बदनाम जो हुए तो क्या,उसमे भी नाम है   
लगती जो पीछे नाम के दुम जात पात की,
होता बिगड़ना चालू ,यहीं पर से काम है
होता है शुरू सिलसिला ,अलगाव ,बैर का,
बंट  जाता कई खेमो में,इंसान आम है
कुछ राजनेता और थोड़े धरम के गुरु,
लगते चलाने अपनी अपनी ,सब दुकान है
है ईंट वही,चूना वही,वो ही पलस्तर ,
रंग जाते अलग रंग में ,सबके मकान है
तन जाती क्यों तलवारें है ,मजहब के नाम पर,
अल्लाह है वो ही,वो ही यीशु ,वो ही राम है
खिलता हुआ चमन है अपना मादरे वतन ,
हैम एक है और एक अपना हिन्दुस्थान है

मदन मोहन बाहेती’घोटू’
 

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