वादा -चाँद तारे तोड़ने का

बीबी बोली ,भरते थे दम ,मेरी चाहत के लिए,
आस्मां से चाँद तारे ,तोड़ कर ले आओगे
बड़ी बातें बनाते थे ,दिखाते थे हेकड़ी ,
मांग मेरी ,सितारों से भरोगे ,चमकाओगे
और अब मैं मांगूं कुछ तो,टालते हर मांग को,
और एक अखरोट तक भी,नहीं तुमसे टूटता
हमने बोला ,हमने जबसे ,शादी की है आपसे,
चाँद तारों की कवायत से न पीछा छूटता
शादी की थी ,तब भी तुमसे ,सात थे वादे किये,
निभाने को जिनके चक्कर में गुजारी ,जिंदगी
आदमी फंस जाता है जब ,गृहस्थी के जाल में,
बैल कोल्हू की तरह ,कटती बिचारी   जिंदगी
फंसता है वो ,चिंताओं के जाल में कुछ इसतरह ,
बाल उड़ते और सर पर, चाँद है आता उतर
इतनी बढ़ती जा रही है,आपकी फरमाइशें ,
आँखों आगे ,दिन में आने लगते है तारे नज़र

मदन मोहन बाहेती’घोटू’

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