२०१४ का चौहदवीं का चाँद
                         १

हमने पत्नी से कहा ,आया है नव वर्ष
बहुत बढ़ी मंहगाई है ,खाली मेरा  पर्स  
खाली मेरा पर्स ,तरस तुम इस पर खाओ
बंद करो फरमाइश ,ये लाओ ,वो लाओ
सन ‘तेरह ‘में ,तेरा तुझको किया समर्पित
अब जो मेरा ,वो तेरा  यदि  रखा  सुरक्षित
                           २  
पत्नी बोली बदलते बरस, न बदले आप
तेरह बीता ,अब चलें ,हम चौदह के साथ
हम चौदह के साथ ,पुराणों की ये गाथा
निकले चौदह रत्न ,उदधि जब गया मथा था
मुझे दिलाना ,चौदह रत्नो वाला गहना
चाँद चौहदवीं का तुम मुझको हरदम कहना

मदन मोहन बाहेती’घोटू’

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