मैं अनुशासित

मैं अनुशासित ,पत्नी शासित
पत्नी पीड़ित ,क्यों परिभाषित
पत्नी प्रेम,पल्लवित पोषित
पत्नी शोषित ,क्यों उदघोषित
तन ,मन और जीवन आनंदित
मैं अनुशासित,पत्नी शासित
नवग्रह रहते सभी शांत है
गृह की गृहणी अगर शांत है
यह आग्रह है,गृह शांति  हित
मैं अनुशासित ,पत्नी  शासित
खुश है अगर आपकी बेगम
घर में आता नहीं कोई गम
सदा रहेगी ,खुशियां संचित
मैं अनुशासित ,पत्नी शासित
मौज मनाओगे जीवन भर
तुम पत्नी के चमचे बन कर
होठों से लग,होंगे हर्षित
मैं अनुशासित  ,पत्नी शासित
उनकी ना में ना ,हाँ में हाँ
मिले जहाँ की सारी खुशियां
सुन्दर भोजन,प्रेम प्रदर्शित
मैं   अनुशासित ,पत्नी शासित
है सच्चा सामिप्य ,समर्पण
सुख पाओगे ,हर पल,हर क्षण
पत्नी को कर जीवन अर्पित
मै अनुशासित  ,पत्नी शासित
भले दहाडो ,तुम दफ्तर में
पर भीगी बिल्ली बन घर में
रहने में ही ,है पति का  हित
मै अनुशासित,पत्नी शासित
यदि पत्नी को दोगे  आदर
खुशियों से भर जाएगा घर
प्रेम सुरभिं से ,सदा सुगन्धित
मै अनुशासित ,पत्नी शासित

मदन मोहन बाहेती’घोटू’

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