शुक्रिया

जिंदगी बन गयी मेरी ,एक सुन्दर ,मधुर धुन,
मेरे सुर से मिलाया ,तुमने, उस सुर का शुक्रिया
जिनने अपनी पाली पोसी ,बेटी मुझको सौंप दी,
शुक्रिया उस सास का और उस ससुर का शुक्रिया
मै तो था एक गोलगप्पा ,हल्का फुल्का ,बेमज़ा,
खट्टा मीठा पानी बन कर ,स्वाद तुमने भर दिया
मेरे मन में चुभ के मुझको ,पीर मीठी दे गयी,
मिल गयी मेरी नज़र से,उस नज़र का शुक्रिया
दिल का मेरे चमन सूखा था,बड़ा बदहाल था ,
तुमने सींचा प्यार रस से ,और महक से भर दिया
 जिसने लायी जिंदगी में ,बहारें और मस्तियाँ  ,
उस गुले गुलजार का ,जाने जिगर का शुक्रिया

मदन मोहन बाहेती ‘घोटू’
 

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