दास्ताने इश्क़

ऐसा तुम्हारे इश्क़ का छाया जूनून था ,
हम पागलों से ,आप के पीछे थे पड़ गये
एक दिन हमारी आशक़ी ,रंग लायी इस कदर,
आकर हमारी बाहों में ,तुम खुद सिमट गए
दावत तो दी थी आपने और भूखे भी थे हम,
लेकिन ये मन ,माना नहीं और हम पलट गए
बदनाम ना कर दे तुम्हे बेदर्द ज़माना ,
ये सोच कर के हम ही थोड़े पीछे हट गए

घोटू

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