तीन चतुष्पदियाँ

बीमा
अपने संतानों के खातिर ,सोचते है कितना हम
मर के भी उनके लिए , कुछ न कुछ कर जाएँ हम
काट कर के पेट अपना ,भरते बीमा प्रीमियम
मिलेगा बच्चों को पैसा ,जब हमें ले जाए यम

फल
जिंदगी अपनी लुटाते है हम जिनकी चाह मे
जीते जी, पर बुढ़ापे में , पूछते ना वो हमें
सोचते ये देख मुझको,आम्र के तरु ने कहा ,
बोया तुम्हारे पिता ने , दे रहा हूँ , फल तुम्हे

दान पुण्य
बोला पंडित ,दान करले ,काम ये ही आयेगा
मरने पर इस पुण्य से ही,मोक्ष को तू पायेगा
मैंने सोचा जन्म अगला,मेरा सुधरे या नहीं ,
दान पाकर,जन्म पंडित का सुधर ,पर ,जाएगा

मदन मोहन बाहेती’घोटू’

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