Archive for April, 2014

साहित्यिक संवाद


साहित्यिक संवाद

पत्नी हिन्दी विशारद ,पति कवि विख्यात
शादी कर के मनाते ,थे सुहाग की रात
नव वधु बोली पति से ,थोड़ा सा शरमाय
आध सेर के पात में,कैसे सेर समाय
पति बोला सुख ना मिले ,यूं ही किनारे बैठ
जिन खोज तीन पैया,गहरे पानी पैठ
प्रथम बार की पीड है,पथ भी है अनजान
करत करत अभ्यास के,जड़मति होत सुजान
या अनुरागी चित्त की,गति समझे ना कोय
ज्यों ज्यों बूढ़े श्याम रंग,त्यों त्यों उज्जवल होय

 

चोली -दामन


चोली -दामन

बच्चों को बतलाई ,पुरानी पीढ़ी की बात
पति और पत्नी जब ले लेते थे फेरे सात
उनमे होजाता था ,चोली और दामन का साथ
नयी पीढ़ी की कन्या को,समझ न आयी ये बात
बोली कि चोली के साथ,टॉप हो स्लीवलेस
मॉडर्न फेशन की ,बन जाती सुन्दर ड्रेस
चोली के रिश्ते की ,बात तो समझते है हम
पर ये तो बतलाओ,क्या होता है दामन ?

घोटू

झुकना सीखो


झुकना सीखो

जब फल लगते है तो डाल झुका करती है
कुवे में जा,झुकी बाल्टी,जल भरती है
बिखरे हुए धरा पर हीरे ,माणिक ,नाना
पाना है तो झुक कर पड़ता उन्हें उठाना
झुको,बड़ों के चरण छुओ ,परशाद मिलेगा
सच्चे दिल से तुमको आशीर्वाद मिलेगा
मुस्लिम जाते मस्जिद,हिन्दू जाते मंदिर
ईश वंदना हरदम की जाती है झुक कर
जब सिग्नल झुकता है,रेल तभी चलती है
झुक कर करो सलाम,बात तब ही बनती है
हरदम रहते तने,बात करने ना रुकते
वोट मांगने ,अच्छे अच्छे ,नेता झुकते
तूफानों में,जो तरु झुकते,रहते कायम
रहते तने,जड़ों से उखड़ा करते हरदम
अगर झुक गयी नज़र,प्यार में उनकी ‘हाँ’है
बिना झुके क्या कभी किसी से प्यार हुआ है
झुकने झुकने में भी पर होता है अंतर
झुके सेंध में, घुसे चोर तब घर के अंदर
चीता जब झुकता है,तेज वार है करता
जितनी झुके कमान ,तीर तेजी से चलता
चलते है झुक, जब हो जाती अधिक उमर है
झुक कर पढ़ते,जब होती कमजोर नज़र है
इसीलिये आवश्यक है ये बात जानना
झुकने वाले की मंशा, हालात जानना
अम्बर झुकता दूर क्षितिज में,धरा मिलन को
झुकना सदा सफलता देता है जीवन को

मदन मोहन बाहेती’घोटू’

खून


खून

माँ बाप ,बेटी बेटे जिनसे रिश्ता खून का,
उन सबके लिए होता दिल में हमको प्यार है
बढ़ता दबाब खून का ,बीमारियां होती,
ज्यादा मिठास खून में भी ,नागवार है
जब जाने जिगर ,दिलरुबा ,आती करीब है ,
तो आने लगता खून में ,अक्सर उबाल है
दुश्मन भी आता सामने तो खून उबलता ,
खून के इंसान की ,फितरत कमाल है

मदन मोहन बाहेती’घोटू’

सुख-साली का


सुख-साली का

शादी तो सबकी होती है,सबको मिलती घरवाली है
पर वो खुश किस्मत होते, जिनको मिलती छोटी साली है
है लाड़ लड़ाती सासूजी,और साली सेवा करती है
सीधी ना टेढ़ी मेढ़ी पर ,साली रस भरी इमरती है
यदि पत्नी दूध उबलता है, साली ,लस्सी,ठंडाई है
सालीजी चाट चटपटी है ,यदि बीबी मस्त मिठाई है
पत्नी यदि हलवे सी ढीली,साली कुरमुरी पकोड़ी है
बीबी ताँगे में जुती हुई,तो साली अल्हड घोड़ी है
पत्नी दीपक दीवाली का ,साली फुलझड़ी ,पटाखा है
चंचल,चुलबुली चपल,सुन्दर हंस दिल पर डाले डाका है
बीबी हो जाती गोल बदन,साली गुलबदन ,नवेली है
बीबी तो बस दिनचर्या है ,साली नूतन अठखेली है
पहले ‘जी’कहती ,और फिर ‘जा’,फिर शरमा कर’जी’ कहती है
अंदाज निराला होता है ,जब वो ‘जीजाजी ‘ कहती है
उससे मिल कर हर जीजा की,तबियत फूलों सी खिलती है
बीबी है घर का माल मगर,साली बोनस में मिलती है
ये लोग कहा करते ,साली ,होती आधी घरवाली है
तो मेरी दो घरवाली है, एक बीबी है,दो साली है

मदन मोहन बाहेती’घोटू’

हाथापाई


हाथापाई
पहलवान दंगल में ,और बच्चे स्कूल में ,
आपस मे करते ही रहते हाथापाई
सत्तारूढ़ सांसद और विपक्षी दल की ,
संसद में चलती ही रहती हाथापाई
करें प्रदर्शनकारी,जब भी कहीं प्रदर्शन,
उनमे और पुलिस में होती हाथापाई
और चुनाव में नेता ,अलग अलग मंचों से ,
करते ही दिखते ,शब्दों की हाथापाई
अगर किसी के संग ,सड़क पर जो हो झगड़ा ,
तो हम उसको भी तो,कहते हाथापाई
चारपाई पर पति पत्नी का प्रेम का प्रदर्शन,
एक तरह वो भी ,होती हाथापाई
अलग अलग लोगों संग ,अलग अलग जगहों पर,
वो ही क्रिया ,जब जाया करती दोहराई
क्रिया वो ही ,प्यार कहीं पर मानी जाती,
और कहीं पर खेल,,कहीं पर वही लड़ाई
घोटू

कुछ ऐसे कर


कुछ ऐसे कर

‘घोटू’तुझको कुछ करना है तो तू कर ,पर कुछ ऐसे कर
तेरा भी बन जाए काम सब ,और किसी को नहीं हो खबर
वरना उडी उडी सी रंगत ,सर के गेसू ,बिखर बिखर कर
बतला देंगे सब दुनिया को,तूने क्या क्या किया रात भर

मदन मोहन बाहेती’घोटू’