विरह गीत

बीत गए कितने दिन
रीत गए कितने दिन
विरहा की अग्नी में,
तड़फे जब तेरे बिन

निंदिया ने उचट उचट
आंसू ने टपक टपक
सपनो ने भटक भटक
इस करवट,उस करवट
तुम्हारी यादों में,
मीत ,गए कितने दिन
बीत गए कितने दिन
इस दिल ने धड़क धड़क
भावों ने भड़क भड़क
यादों ने उमड़ उमड़
तड़फाया ,तड़फ तड़फ,
कैसे हम जी पाये,
बिना प्रीत,इतने दिन
बीत गए कितने दिन

मदन मोहन बाहेती’घोटू’

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