साहित्यिक संवाद

पत्नी हिन्दी विशारद ,पति कवि विख्यात
शादी कर के मनाते ,थे सुहाग की रात
नव वधु बोली पति से ,थोड़ा सा शरमाय
आध सेर के पात में,कैसे सेर समाय
पति बोला सुख ना मिले ,यूं ही किनारे बैठ
जिन खोज तीन पैया,गहरे पानी पैठ
प्रथम बार की पीड है,पथ भी है अनजान
करत करत अभ्यास के,जड़मति होत सुजान
या अनुरागी चित्त की,गति समझे ना कोय
ज्यों ज्यों बूढ़े श्याम रंग,त्यों त्यों उज्जवल होय

 

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