चुनाव के बाद-ऐसा भी हो सकता है

इस बार ‘नमो’ की आंधी ने, मौसम इस कदर बदल डाला
हो गयी जमानत कई जप्त ,कितनो ने बदल लिया पाला
पड़ गए मुलायम और नरम,माया का हाथी गया बैठ
लालू की लालटेन का भी ,अब खत्म हो गया घासलेट
डिग्गीराजा ,फिर से दुल्हेराजा ,बनने में है व्यस्त हुए
छोटे मोटे दल,तोड़ फोड़ की राजनीती से पस्त हुए
जयललिता भी लालायित थी ,पाने को कुर्सी दिल्ली की
जनता का मिला फैसला तो,अब चुप है भीगी बिल्ली सी
केजरीवाल है जरे जरे ,झाड़ू फिर गयी उम्मीदों पर
शेखी नितीश की इति हुई ,नम है ममता ,निज जिद्दों पर
चुप चुप बैठे है चिदंबरम ,बीजूजी,बिजना हिला रहे
और है पंवार ,पॉवर प्रेमी ,मोदी सुर में सुर मिला रहे
मनमोहनजी है मौन शांत ,क्या जरुरत है कुछ कहने की
पिछले दस सालों में आदत ,पड़ गयी उन्हें चुप रहने की
शहजादा ,ज्यादा ना बोले ,मेडमजी का दम निकल गया
है डरा वाडरा परिवार ,किस्मत का चक्कर बदल गया
सो नहीं सोनिया जी पाती,सिब्बल जी भी ,बलहीन हुए
जबसे मोदी जी ,दिल्ली की ,कुर्सी पर है आसीन हुए

मदन मोहन बाहेती’घोटू’

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