संसद के गलियारों में एक चर्चा या अफवाह सुनने को मिली
एक वृद्ध राजनेता जो कि अपने से काफी काम उम्र की महिला
से विवाह कर रहे है ,जब पहली बार उससे मिले ,तो उस महिला ने
उन्हें ‘अंकल’कह कर बुलाया था और इस पर उन्होंने जो उत्तर दिया था
उस से ही प्यार की शुरुवात हुई थी – उंन्होने क्या कहा था ,वह निम्न
पंक्तियों में वर्णित है

‘अब भी आवाज में मेरी ,बुलंदी वो कि वो ही है ,
पुराना हो गया है पर,नहीं ये ढोल बदला है
वो ही फ़ुटबाल का मैदान है,वो ही खिलाड़ी है ,
नहीं तो ही ‘बाल’ बदली है ,और ना गोल बदला है
पुरानी चीज बनके ‘एंटीक’हो जाती है मंहगी ,
हुआ अनमोल हूँ मैं ,ना ही मेरा मोल बदला है
मुझे कह कर के ‘अंकल ‘क्यों. कलेजे को जलाती हो,
मेरा इतिहास बदला है ,नही भूगोल बदला है

घोटू

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