पसीना सबका छूटा है

कभी लन्दन की महारानी,कभी इटली की महारानी ,
विदेशी मेडमो ने देश मेरा ,खूब लूटा है
सताया खूब जनता को,मार मंहगाई की चाबुक ,
बड़ी मुश्किल से अब की बार उनसे पिंड छूटा है
दुखी जनता बड़ी बदहाल थी और परेशाँ भी थी,
घड़ा जो पाप का था भर गया ,अब जाके फूटा है
गिरी का शेर बब्बर जब दहाड़ा जोशमे आकर,
रंगे सियार थे जितने ,पसीना सब का छूटा है

घोटू

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