रोज त्योंहार कर लेते

तवज्जोह जो हमारी तुम ,अगर एक बार कर लेते
तुम्हारी जिंदगी में हम ,प्यार ही प्यार भर देते
खुदा ने तुम पे बख्शी हुस्न की दौलत खुले हाथों,
तुम्हारा क्या बिगड़ जाता ,अगर दीदार कर लेते
पकड़ कर ऊँगली तुम्हारी ,हम पहुंची तक पहुँच जाते ,
इजाजत पास आने की,जो तुम एक बार गर देते
तुम्हारे होठों की लाली ,चुराने की सजा में जो ,
कैद बाहों में तुम करती ,खता हर बार कर लेते
तुम्हारे रूप के पकवान की ,लज्जत के लालच में,
बिना रमजान के ही रोजे हम ,सौ बार कर लेते
बिछा कर पावड़े हम पलकों के ,तुम्हारी राहों में ,
उम्र भर तुमको पाने का ,हम इन्तेजार कर लेते
तुम्हारे रंग में रंग कर,खेलते रोज होली हम,
जला दिये दीवाली के ,रोज त्यौहार कर लेते

मदन मोहन बाहेती’घोटू’

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